मोटापे से हैं परेशान? तो Ragi in Hindi में जानिए इसके लाभ और नुकसान।

रागी के फायदे वजन कम करने में ही नहीं प्रोटीन से भरपूर रागी खाने के और भी कई फायदे हैं। शरीर में खून की कमी की समस्या को दूर करने की बात हो या कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर लेवल की, रागी हर चीज में फायदेमंद मानी जाती है। वजन घटाने के लिए ज्यादातर लोग रागी का इस्तेमाल करते हैं। इसे खाने से पहले जान लें इसके फायदे और नुकसान दोनों।

आप लोग पहले से ही जानते हैं कि प्राचीन काल से हमारे देश में पारंपरिक मोटे अनाज जैसे जौ, मक्का, ज्वार आदि का सेवन किया जाता है और आपको बता दें कि उन्हें मोटे अनाजों में से एक रागी भी है। जो हमारा स्वास्थ्य है। रागी को मंडुआ, बाजरा और नाचनी के नाम से जाना जाता है। रागी में ऊर्जा मुख्य रूप से पाई जाती है। रागी एक बहुत ही स्वादिष्ट अनाज है। ऐसा पाया जाता है कि अगर हम रोजाना रागी का सेवन अपने आहार के रूप में करते हैं, तो निश्चित रूप से हमारे शरीर में होने वाली सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी।

रागी एक ऐसा अनाज है जिसका इस्तेमाल कई तरह की दवाओं के रूप में भी किया जाता है। कुछ लोग रागी के फायदे के नाम से जानते हैं। यह कैसे और किन खाद्य पदार्थों के रूप में सेवन किया जाता है, तो आइए हम आपको इन सभी के बारे में विस्तार से बताते हैं।

Table of Contents

रागी क्या है?(What is Ragi in Hindi)

रागी सबसे पुराने और खाने योग्य मोटे अनाजों में से एक है, जिसे भारत में 4000 ईसा पूर्व में लगाया गया था। रागी कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गोवा में बहुतायत में पाया जाता है। इन्हीं में से एक व्यक्ति इसका सेवन भी करता है। यह खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता है और इसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। रागी को मंडुआ, नाचनी, बाजरा आदि के नाम से भी जाना जाता है। रागी को किसी भी समय खेतों में लगाया जा सकता है। आज भारत रागी का सबसे बड़ा निर्यातक है।

रागी होती कैसी है?

अगर आप लोगों ने कभी रागी नहीं देखी है और पहली बार देख रहे हैं, तो मैं आप सभी को बता दूं, यह कुछ सरसों की तरह दिखता है, जैसे सरसों के दाने गोल और छोटे होते हैं, वैसे ही रागी के बीज भूरे रंग के होते हैं। रंगीन और झुर्रीदार।

रागी का पौधा कैसा होता है?

रागी के पौधे की बात करें तो यह करीब 1 मीटर ऊंचा होता है। इसकी खासियत यह है कि इसे हम सूखे मौसम में भी उगा सकते हैं। वैसे रागी की कई किस्में हैं जो भारत और अन्य देशों में उगाई जाती हैं। इस लेख में हम आपको रागी की कुछ खास किस्मों के बारे में बताएंगे, तो आइए देखते हैं-

शुवरा (OUAT-2) : क्या आप जानते हैं कि रागी की किस्म जिसमें एक मीटर ऊंचाई के पौधे होते हैं, लगभग 7-8 सेमी की बालियां होती हैं और यह सभी पौधों के लिए मध्यम प्रतिरोध होती है।

चिल्का (OEB-10) : रागी की इस किस्म के पौधे लंबे और चौड़े पत्ते वाले होते हैं और इन पौधों की पत्तियों का रंग हल्का हरा होता है।

VL 149: आज हम आपको बताते हैं कि इस किस्म के रागी के पौधे में रंगीन गांठ होती हैं और रागी की इस किस्म का रंग हल्का बैंगनी होता है और यह मैदानी व पठारी इलाकों में पैदा होती है और झुलसी भी होती है| रोग प्रतिरोधी होती है रागी|

GPU 45: क्या आप जानते हैं कि रागी की इस किस्म के पौधे हरे रंग के होते हैं और इन पौधों के झुमके थोड़े मुड़े हुए होते हैं और रागी की यह किस्म झुलसा रोग के लिए भी प्रतिरोधी होती है और यह फसल जल्दी पकने के लिए तैयार हो जाती है। आपको बता दें कि रागी के सभी पौधे एक तरफ झुर्रीदार और चपटे होते हैं जो देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं।

क्या है रागी के अन्य नाम?

भारत में कई राज्य और कई राज्यों की भाषाएं पूरी तरह से अलग हैं, इस कारण आपको रागी के अन्य नामों को भी जानना चाहिए –

रागी का वानस्पतिक नाम – एलुसैनी कोराकैना

रागी का मलयालम नाम- मुत्तरी

रागी का हिंदी नाम – रागी, नाचनी, मंडुआ,

रागी का संस्कृत नाम- न्रित्य्कुंदल

रागी का अंग्रेजी नाम- फिंगर मिलेट, इंडियन मिलेट

रागी का पंजाबी नाम- चलोडरा

रागी का तेलुगु नाम- रागुलू

रागी का तमिल नाम- केल्वारागु

रागी का अरबी नाम- तैलाबोन

रागी का मराठी नाम- नचीरी

रागी का राजस्थानी नाम- रागी

रागी का प्रयोग

रागी का उपयोग भारत में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में किया जाता है, जहाँ रागी के आटे का उपयोग डबल रोटी, सादी रोटी बनाने के लिए किया जाता है। रागी का प्रयोग छोटे बच्चों के लिए किया जाता है। रागी को दूध में मिलाकर पकाया जाता है और खिलाया जाता है। रागी से कई तरह की रेसिपी बनाई जाती हैं जैसे हलवा, डोसा, इटली, बाटी आदि। रागी का प्रयोग ज्यादातर बीमार व्यक्ति के लिए किया जाता है। रागी का उपयोग लड्डू बिस्किट के रूप में किया जाता है और कई लोग इसे बर्फी के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं।

रागी में पाए जाने वाले पोषक तत्व-

रागी में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को मजबूत और स्वस्थ रखते हैं, जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज, कैल्शियम, फाइबर, ऊर्जा आदि पाए जाते हैं। इसके अलावा रागी में आयोडीन, ईथर, कैरोटीन, सोडियम, जिंक, मैग्नीशियम, विटामिन बी1, विटामिन बी2, विटामिन बी3, आदि सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में पाए जाते हैं। आप लोग जानते ही हैं कि रागी में ढेर सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ हम आपको कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन जैसे मैक्रोन्यूट्रिएंट्स के बारे में बताते हैं और उस मैक्रोन्यूट्रिएंट्स के साथ रागी में कुछ मिनरल्स और विटामिन्स भी पाए जाते हैं।

इसमें सोडियम और कोलेस्ट्रॉल भी पाया जाता है जो हमारे दिल की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके साथ ही रागी में विटामिन ई और सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो हमारी इम्यूनिटी और त्वचा के साथ-साथ बालों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। रागी के आटे में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स जैसे राइबोफ्लेविन, नियासिन, फोलिक एसिड और थायमिन के साथ-साथ मैग्नीशियम, आयरन, फास्फोरस और कैल्शियम भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। रागी में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए रागी हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है और रागी में इन सभी पोषक तत्वों की मौजूदगी के कारण रागी को सुपर फूड कहा जाता है।

रागी खाने के फायदे

  • रागी में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। 
  • अगर घुटनों, कमर और हाथों में दर्द हो तो रागी का सेवन फायदेमंद होता है। 
  • रागी के नियमित सेवन से लीवर स्वस्थ रहता है, जिससे गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। 
  • रागी का सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है और शरीर में जलन, त्वचा विकार, किडनी की पथरी की समस्या में भी रागी का प्रयोग किया जाता है। 
  • रागी त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है रागी के इस्तेमाल से त्वचा मुलायम और खूबसूरत बनती है। रागी के आटे का उपयोग त्वचा को निखारने के लिए उपाय के रूप में किया जाता है।

रागी के औषधीय गुण

रक्तचाप के रोगी के लिए रागी का प्रयोग-

जब लोगों को ब्लड प्रेशर की बीमारी होती है तो डॉक्टरों का कहना है कि ब्लड प्रेशर के मरीजों को रागी की रोटी खिलाने से उन मरीजों को फायदा होता है. और शुगर के मरीजों के लिए रागी की रोटी खाना भी फायदेमंद होता है|

एनीमिया रोग को दूर करने के लिए रागी खाने के फायदे-

रागी में भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है अंकुरित रागी में विटामिन सी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे भोजन में पाए जाने वाले आयरन का अवशोषण बढ़ जाता है, जिससे शरीर में रक्त का स्तर बढ़ जाता है, यह महिलाओं और बच्चों में सबसे ज्यादा होता है। रागी का इस्तेमाल आप खून बढ़ाने के लिए किसी भी रूप में कर सकते हैं, लेकिन सुबह खाली पेट रागी के बीज खाने से सबसे ज्यादा खून बढ़ाने में मदद मिलती है।

रागी का प्रयोग कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए

कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर के रक्त में पाया जाने वाला एक वसा है जो शरीर के सभी कार्यों के लिए बहुत आवश्यक है लेकिन जब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है तो यह बहुत घातक हो जाता है और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर बढ़ते कोलेस्ट्रॉल को रोकना बहुत महत्वपूर्ण होता है जब रक्त के थक्के बनते हैं। शरीर में बनता है, जिससे हृदय से संबंधित कई रोग हो जाते हैं। अगर आप कोलेस्ट्रॉल कम करना चाहते हैं तो रागी का इस्तेमाल करें।

मधुमेह को नियंत्रित करने में रागी का प्रयोग

यह एक बहुत ही गंभीर बीमारी है, यह भारत में सबसे अधिक होती है, इसलिए भारत को मधुमेह की राजधानी कहा जाता है, यदि यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है, तो उसका जल्दी ठीक होना संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित करके, यह निश्चित रूप से हो सकता है। रागी में भरपूर मात्रा में पॉलीफेनोल और फाइबर पाया जाता है जो मधुमेह को कम करता है। रागी का सेवन शरीर में ग्लूकोज के स्तर को कम करता है, जो मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है।

वजन कम करने में रागी का प्रयोग

आप सभी जानते ही होंगे कि रोटी का सेवन करने से वजन तो कम होता है लेकिन जब तक आप रोटी कम खाते हैं तो जब आप अपनी रोटी की मात्रा पहले की तरह बढ़ाएंगे तो आपका वजन फिर से बढ़ने लगेगा. इसलिए हम आपको बताते हैं। अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो रागी का प्रयोग करें। रागी वजन घटाने का एक अच्छा स्रोत है क्योंकि रागी में बहुत अधिक मात्रा में फाइबर होता है, इसलिए अगर आप अन्य अनाज का सेवन करने के बजाय रागी के दानों से बनी रोटियां खाना चाहते हैं। अगर आप इसका सेवन करते हैं तो आपका वजन जरूर कम होगा।

रागी के इस्तेमाल से पाएं डैंड्रफ से छुटकारा

महुआ, हैबर, नीलकमल और मधुलिका का चूर्ण घी और शहद के साथ लेने से रूसी दूर हो जाती है।

बच्चों के लिए भी फायदेमंद है रागी, जानिए कैसे?

रागी एक ऐसा पौष्टिक आहार है जो न सिर्फ बड़ों बल्कि बच्चों के लिए भी बहुत उपयोगी होता है। अक्सर बच्चों को छह महीने की उम्र के बाद पौष्टिक आहार दिया जाता है, जो बच्चों के समग्र विकास के लिए बहुत जरूरी है। रागी में कैल्शियम और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। कैल्शियम और प्रोटीन ऐसे तत्व हैं जो किसी भी बच्चे के विकास के लिए बहुत जरूरी होते हैं और रागी में कुछ एंटीऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, एंटी-डायबिटिक गुण भी पाए जाते हैं, जो बच्चों को कई बीमारियों से बचाते हैं। यह बहुत फायदेमंद भी होता है।

मां का दूध बढ़ाने में फायदेमंद है रागी

आपने सुना होगा कि सभी डॉक्टर कहते हैं कि नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। छह माह तक बच्चों को केवल मां का दूध ही पिलाया जाता है। आप जानते हैं कि यदि बच्चों को माँ द्वारा खिलाया जाता है। यदि दूध की मात्रा कम हो तो शिशुओं के विकास में मंदी आती है। यदि माँ मुख्य रूप से अपने बच्चों को दूध की मात्रा खिलाना चाहती है, तो रागी को मुख्य रूप से अपने आहार के रूप में खाना चाहिए। रागी में कैल्शियम, आयरन, अमीनो एसिड आदि अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, ये ऐसे तत्व हैं जो मां के दूध को बढ़ाने में मदद करते हैं। और गर्भवती महिलाओं के लिए भी रागी का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

ब्लड प्रेशर कम करने में फायदेमंद है रागी

आजकल ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या आम हो गई है। और ब्लड प्रेशर को रोकने के लिए सभी को ब्लड प्रेशर की दवा खानी पड़ती है। रागी में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मददगार होते हैं। अगर आप रागी के आटे की रोटी खाते हैं, जिससे रक्तचाप नियंत्रित रहता है।

Vomiting रोकने के लिए रागी का सेवन

कई लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें उल्टी की समस्या बनी रहती है। तो हम आपको बताते हैं कि इस समस्या से निजात पाने के लिए आपको रागी का इस्तेमाल करना चाहिए। उल्टी बंद करने के लिए नीलकमल, महुआ, हाउबेर और मधुलिका का चूर्ण घी और शहद के साथ लेने से उल्टी बंद हो जाती है।

सर्दी-जुकाम में रागी का उपयोग फायदेमंद

जुकाम होने पर राल, चील, गुग्गुल, प्रियांगु, शक्कर, शहद, मुलेठी और मधु का काढ़ा बनाकर पीने से सर्दी-जुकाम में लाभ होता है। लेकिन आप जानते हैं कि हमें सबसे ज्यादा क्या फायदा होता है। खपत के कारण होता है। इसलिए हमें रागी का सेवन जरूर करना चाहिए।

रागी का श्वसन रोग में उपयोग

आप सभी जानते ही होंगे कि बहुत से लोगों को सांस संबंधी बीमारियां होती हैं। इसलिए बेदम मरीजों के लिए रागी का सही तरीके से सेवन करना फायदेमंद होता है। रागी आदि द्रव्यों से विधिपूर्वक बनाए जाते थे। शहद युक्त चीजों का कम मात्रा में सेवन करने से सांस की समस्या के मरीजों को फायदा होता है। रागी सभी रोगों में लाभकारी है।

कब्ज में फायदेमंद रागी का सेवन

कब्ज एक ऐसी बीमारी है जो कई बीमारियों का कारण बनती है। कब्ज होने पर व्यक्ति को हमेशा पेट की समस्या रहती है और इससे परेशान होकर व्यक्ति दवा खाकर और भी कई घरेलू उपाय करता है। आपको बता दें कि रागी इन सब चीजों से ज्यादा फायदेमंद होता है। कब्ज होने पर रागी के बीजों का प्रयोग करें। रागी के बीजों में सेल्यूलोज की मात्रा अधिक होने के कारण इसे रोजाना इस्तेमाल करने से कब्ज से छुटकारा मिल सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि कब्ज की बीमारी कितनी भी पुरानी क्यों न हो, रागी का प्रयोग इस रोग में लाभकारी होता है।

दस्त रोकने के लिए रागी के प्रयोग

डायरिया होने पर डायरिया से पीड़ित लोग रागी के आटे का प्रयोग करते हैं। पेट में दर्द होने पर भी रागी का प्रयोग करना चाहिए। दस्त में रागी के प्रयोग की जानकारी के लिए आपको आयुर्वेदिक औषधि से परामर्श लेना चाहिए।

लीवर की समस्या में फायदेमंद है रागी

रागी एक ऐसा अनाज है जिसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो हमारे शरीर में होने वाली सभी समस्याओं के लिए फायदेमंद होते हैं। रागी लीवर के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। रागी हमारे शरीर से फ्री रेडिकल्स को दूर करता है, जिससे गाल ब्लैडर और लीवर स्वस्थ रहता है। और इससे यह शरीर के सभी गैर-जरूरी विषाक्त पदार्थों को निकालता है और शरीर स्वस्थ रहता है।

रागी के नुकसान

  • रागी का अधिक सेवन हानिकारक है, रागी के अधिक सेवन से शरीर में ऑक्सालिक एसिड की वृद्धि होती है।
  • गुर्दे की पथरी वाले लोगों को भी रागी का सेवन नहीं करना चाहिए। 
  • रागी किडनी के मरीजों के लिए भी बेहद हानिकारक है। 
  • रागी एक लाभकारी अनाज है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, जब आप रागी का अधिक मात्रा में सेवन करेंगे तो आपको उल्टी, दस्त, चक्कर आना जैसे कुछ दुष्प्रभाव होने लगेंगे।

रागी की खेती कैसे की जाती है?

आज हम आप सभी को बताएंगे कि रागी की खेती कैसे की जाती है। तो बता दें- रागी की खेती के लिए शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। आप जानते हैं कि भारत में अधिकांश लोग इसे खरीफ की फसल के रूप में लगाते हैं। लेकिन रफी की फसल कम होती है और रागी के पौधे समुद्र तल से 2000 मीटर तक आसानी से उगाए जा सकते हैं। इसकी खेती से किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होता है। भारत में रागी की खेती दक्षिणी और पूर्वी राज्यों और उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में की जाती है। रागी की खेती में की जाती है

रागी के लिए उपयुक्त मिट्टी

वैसे तो रागी की खेती कई प्रकार के कार्बनिक पदार्थ समृद्ध और उपजाऊ मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन रागी की खेती के सर्वोत्तम उत्पादन के लिए रेतीली मिट्टी सबसे अच्छा स्रोत है, रागी की खेती के लिए इसका पीएच मान 5.5 से 8 तक होता है। और होना भी नहीं चाहिए। रागी के खेतों में जलजमाव हो गया है|

रागी के लिए उपयुक्त जलवायु और तापमान

रागी की खेती करते समय तापमान 35 डिग्री होना चाहिए क्योंकि 35 डिग्री तापमान पर वृद्धि अधिक होती है। और बाद में जब रागी के बीज पौधे के रूप में विकसित होने लगते हैं तो उसे 30 डिग्री तापमान की जरूरत होती है।

FAQ-

बाजार में रागी का भाव क्या होता है?

रागी बाजार में आमतौर पर 100 से 200 रुपये किलो मिलता है।

रागी का अंग्रेजी नाम क्या है?

रागी का अंग्रेजी नाम फिंगर मिलेट है।

रागी को मराठी में क्या कहते हैं?

रागी को मराठी में नाचनी और मंडुआ के नाम से जाना जाता है।

रागी के उपयोग के बारे में विशेष जानकारी क्या है?

रागी को कई जगहों पर कोडो के नाम से भी इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन जो मुख्य कोडो हैं वे अलग-अलग प्रजातियों के हैं। अलग कोडो का नाम को फ्लूइड (Paspalum scrobiculatum Linn.) है।

रागी का दूसरा नाम क्या है?

रागी का दूसरा नाम मंडुआ है।

निष्कर्ष (Conclusion)

दोस्तों, आज हमने आपको Ragi In Hindi में समझाया| Ragi Meaning in Hindi, Ragi Flour in Hindi, Ragi in Hindi Name, What is Ragi in Hindi ये सब लिखकर लोग google पर सर्च करते हैं और ये जानने की कोशिश करते हैं कि रागी क्या होता है? कुछ लोग रागी की खेती के बारे में भी जानना चाहते हैं| बहुत से ऐसे भी लोग हैं जो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से पूछते हैं कि What is Ragi Called in Hindi/ What is Ragi Flour in Hindi| आज हमने अपने इस article में रागी के बारे में हर वो जानकारी देने की कोशिश की है जो आप जानने के इच्छुक हैं| अगर आपको हमारा ये प्रयास अच्छा लगा तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों को share जरूर करें| आपसे फिर होगी मुलाकात एक नई जानकारी के साथ|

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