Manusmriti in Hindi में जानकारी

नमस्कार दोस्तों| एक बार फिर से आप सभी का स्वागत है| आज हम आपको बताने वाले हैं ‘मनुस्मृति’ के बारे में| हो सकता है की मनुस्मृति का नाम आज की युवा पीढ़ी ने न सुना हो, लेकिन कोई बात नहीं| आज हम आपको बताएँगे मनुस्मृति से जुड़े हर पहलू के बारे में| दोस्तों, Manusmriti in Hindi में लिखने का हमारा एक ही मकसद है की आपको मनुस्मृति की पूरी जानकारी हो जाए और वो भी आसान भाषा में| क्यूंकी हिंदी हमारी मात्र भाषा है, इसलिए हम आपको Manusmriti in Hindi में समझाने वाले हैं और वो भी फुल detail में| बस आप हमारे article से अंत तक जुड़े रहिएगा| दोस्तों, चारों वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के बाद मनुस्मृति एक ऐसी पुस्तक है जो सबसे प्राचीन मानी जाती है|

मनुस्मृति में क्या कहा गया है ?

मनुस्मृति में चारों वेदों को अच्छे से परिभाषित किया गया है| यानी अगर किसी को चारों वेदों के बारे में अच्छे से जानना और समझना है तो उसे मनुस्मृति पढ़नी चाहिए| इसके अलावा इसमें धर्म के लक्षणों के बारे में भी बताया गया है| 

मनुस्मृति के अनुसार धर्म के 10 लक्षण पाए जाते हैं| मनुस्मृति को किसी भी धर्म से नहीं जोड़ा गया है| इसमें जो भी बातें बताई गई है, जो धर्म के लक्षण बताए गए हैं वो प्रत्येक व्यक्ति के लक्षण हैं चाहे वो किसी भी धर्म या मजहब का हो| आइए दोस्तों, इसे एक श्लोक के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं की आखिर कौन से वो दस लक्षण हैं जिनके बारे में मनुस्मृति में जिक्र किया गया है| यहाँ पर एक बात समझने वाली है वो ये की मनुस्मृति में धर्म का मतलब कर्तव्यों से है| चलिए सबसे पहले नजर दाल लेते हैं श्लोक पर और फिर आपको उसका मतलब समझाएंगे इसलिए हम आपको Manusmriti in Hindi में समझाने वाले हैं और वो भी फुल detail में|

“धृति क्षमा दमोस्तेयं, शौचं इन्द्रियनिग्रहः।

धीर्विद्या सत्यं अक्रोधो, दसकं धर्म लक्षणम ॥

साथियों, मनुस्मृति में मनुष्य के 10 लक्षण बताए गए हैं| अगर वह इन लक्षणों पर खरा उतरता है तो वह अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन कर रहा है| वो लक्षण इस प्रकार हैं : –

धृति : धृति का अर्थ है धैर्य| अगर किसी मनुष्य में धैर्य नहीं है तो उसे जीवन में कभी सफलता नहीं मिल सकती| क्यूंकी जान उस व्यक्ति में धैर्य नहीं होगा, वो अधीर होगा, हर काम में जल्दबाजी करेगा तो उसके काम बनने की बजाए बिगड़ते चले जाएंगे| इसलिए हर इंसान में धैर्य का होना बेहद जरुरी है|

क्षमा : एक सच्चे मनुष्य का दूसरा लक्षण है क्षमा यानी forgiveness| सबको माफ़ कर देना| किसी के प्रति बैर भाव ना रखना, चाहे उस व्यक्ति ने आपके साथ कुछ गलत भी किया हो तो भी आपको बड़ा दिल रखते हुए उसे माफ़ कर देना चाहिए| जैसा की कहा भी गया है ‘क्षमा वीरस्य भूषणम|’ किसी को क्षमा करने का काम केवल वीर ही कर सकते हैं|

दम : दोस्तों, इसका मतलब है मन के हिसाब से न चलना बल्कि अपने मन को काबू में रखना| क्योंकि मन कई बार हमें गलत काम की और आकर्षित कर देता है| लेकिन हमें अपने मन को काबू में रखना है| मन को अपने विवेक पर हावी नहीं होने देना है|

अस्तेयं : साथियों इसका मतलब होता है चोरी न करना| हमारे सामने चाहे बुरी से बुरी परिस्थिति क्यों ना आ जाए हमें कभी भी चोरी करने का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए|

शौचं : इसका मतलब होता है की हमें सफाई से रहना चाहिए| प्रतिदिन नित्य क्रियाओं को करना और साथ ही अपने मन के विचारों को भी शुद्ध रखना|

इन्द्रियनिग्रह : दोस्तों इसका मतलब है, हमें अपनी इन्द्रियों को अपने वश में रखना चाहिए|

धी : मनुस्मृति में बताया गया अगला लक्षण है धी जिसका मतलब है बुद्धिमान होना|

विद्या : दोस्तों हमें अपनी विद्या यानी की पढ़ाई लिखाई निरंतर जारी रखनी चाहिए|

सत्यं :  मनुष्य को हमेशा सत्य की राह पर चलना चाहिए| कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए|

अक्रोधो : इसका मतलब है दोस्तों की मनुष्य को कभी भी किसी पर भी क्रोध नहीं करना चाहिए| क्रोध करने से केवल उसका नुकसान नहीं होता है जिस पर हम क्रोध कर रहे हैं लेकिन हमारा भी नुकसान होता है|

जिस मनुष्य में ये 10 लक्षण हैं उसका मतलब है वो मनुष्य अपने कर्तव्य का अच्छे से पालन कर रहा है|

क्या है मनु की कहानी

क्या है मनु की कहानी

दोस्तों आज हम आपको Manusmriti in Hindi में समझाने से पहले ये बताने वाले हैं की मनु कौन थे? आज साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है| लेकिन science भी इस बात का पता नहीं लगा पाई की इस दुनिया का सबसे पहला मनुष्य कौन था| ऐसा माना जाता है की इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की रचना भगवान ब्रह्मा ने ही की है|

जब उन्होंने ब्रह्माण्ड की रचना की, उसके बाद उन्होंने सबसे पहले सनत कुमारों को प्रकट किया| इसके बाद उन्होंने रूद्र भगवान यानी भगवान भोलेनाथ को उत्पन्न किया| शिव भगवान के बाद उन्होंने 10 ऋषियों को प्रकट किया| इसके बाद ब्रह्म देव ने एक कन्या को प्रकट किया जिनका नाम है माता सरस्वती| इन सबकी रचना के बाद भगवान ब्रह्मा पुनः ध्यान में लीन हो गए|

ठीक उसी समय उनके दाहिने भाग से एक पुरुष प्रकट हुए और बाएं भाग से एक स्त्री की उत्पत्ति हुई| यह दोनों मनु और शतरूपा कहलाते हैं| फिर ब्रह्म देव ने मनु और शतरूपा का विवाह करवाया| इसलिए हम आपको Manusmriti in Hindi में समझाने वाले हैं और वो भी फुल detail में| तब ब्रह्मा जी ने उन दोनों को आदेश दिया की सृष्टि के सृजन में मेरा सहयोग करो आप दोनों|

तभी महाराज मनु बोले की हम सृष्टि की रचना तो कर देंगे लेकिन एक चिंता का विषय ये है भगवान कि हम रहेंगे कहाँ ? क्यूंकी धरती तो जल में डूबी हुई थी| उसी समय भगवान को छींक आई और ब्रह्मा जी के नाक से भगवान विष्णु वराह के रूप में प्रकट हुए|

देखते ही देखते भगवान वराह विशालकाय रूप धारण किए और जल में प्रवेश करके धरती माता को बाहर लेकर आए| कुछ विद्वानों का मानना है कि जिस समुद्र में हिरण्याक्ष ने धरती को डुबोया था वह धरती का समुद्र नहीं था|

बल्कि वो आपोमय समुद्र था जिसको एक और नाम से भी जाना जाता है वो है अर्णव| साथ ही इस समुद्र को पारमेष्ठीय समुद्र भी कहते थे| ये वो समुद्र था जो सौर मंडल में फैला हुआ था| आज के समय में हम उसे गोल्डी लॉक जोन कहते हैं| जो ग्रह इस जोन के बाहर थे उन पर जीवन पनपने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है| इसीलिए भगवान विष्णु ने वराह अवतार लिया और हिरण्याक्ष के चंगुल से धरती को छुड़ाने लगे|

तब हिरण्याक्ष उन्हें भला बुरा कहने लगा| पहले तो भगवान विष्णु कुछ नहीं बोले, लेकिन जब वो नहीं माना तो भगवान ने हिरण्याक्ष का वध किया| फिर सौरमंडल में पृथ्वी को स्थापित कर दिया| विदुर जी ने मैत्रेय मुनि से एक प्रशन किया की वो असुर कौन था जो इतना शक्तिशाली था की भगवान तक से लड़ने लगा, उन्हें चुनौती देने लगा| तब मुनि ने कहा की भगवान विष्णु के द्वारपाल थे जय और विजय| जब दोनों को ये घमंड हो गया की वो तो स्वयं भगवान विष्णु के द्वारपाल हैं वैकुण्ठ में|

तब भगवान ने उन्हें श्राप दिलवाया सनत कुमारों से| उन्होंने दोनों को श्राप दिया की तुम तीन जन्मों के लिए असुर बन जाओ| इसी कारण पहले जन्म में दोनों हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप बने| दूसरे जन्म में वही दोनों रावण और कुम्भकरण बने| फिर तीसरी बार वही जय और विजय दंतवक्र और शिशुपाल बने| पहली बार भगवान विष्णु वराह और नरसिंह बन कर आए और दोनों हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप का उद्धार किया|

दूसरी बार भगवान विष्णु श्री राम के रूप में आए तथा रवाण और कुम्भकरण का उद्धार किया| इसके बाद तीसरे जन्म में यही जय और विजय दन्तवक्र और शिशुपाल के रूप में आए और तब भगवान विष्णु ने कृष्ण भगवान का अवतार लेकर दोनों का वध किया| ये दोनों असुर कश्यप और दिति के पुत्र थे| जब भगवन विष्णु धरती माता को छुड़ा लाए असुर के चंगुल से तब धरती पर मनु और शतरूपा का दांपत्य जीवन शुरू हुआ| ऐसा माना जाता है की मनुस्मृति की रचना शुंग वंश के समय में हुई थी|

आपको एक बार फिर से याद दिला दें कि आज हम आपको Manusmriti in Hindi के बारे में विस्तार से बता रहे हैं| Manusmriti in Hindi में हम आपको इसलिए समझा रहे हैं क्यूंकि हम चाहते हैं की आप मनुस्मृति के बारे में सब कुछ अच्छे से समझ लें| साथ ही दूसरों को भी Manusmriti in Hindi में समझाकर उनके ज्ञान को भी बढ़ा सकें|

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क्यों विवादों में आई मनुस्मृति

दोस्तों चलिए आपको बताते हैं कि आखिर क्यों विवादों में घिरी रहती है मनुस्मृति| दरअसल ये हम नहीं कह रहे| लोगों का ऐसा मानना है की मनुस्मृति में शूद्रों के बारे में बहुत ही बुरे विचार लिखे गए हैं| इतना ही नहीं, नारी के बारे में भी कुछ खराब बातें मनुस्मृति में लिखी हैं इसलिए हम आपको Manusmriti in Hindi में समझाने वाले हैं|

मनुस्मृति में लिखा है कि मानवता के कल्याण के लिए ब्रह्मा जी ने ब्राह्मणों को अपने मुख से पैदा किया| क्षत्रियों को अपनी भुजाओं से, वैश्यों को अपनी जांघों से जन्म दिया और शूद्रों को अपने पैरों से जन्म दिया| मनुस्मृति के अनुसार भगवान ने कहा है की एक शूद्र ऊपरी वर्णों के लोगों की श्रद्धा पूर्वक सेवा करे| उसका यही धर्म है|

मनुस्मृति में एक और बात लिखी है की ‘सौ साल के क्षत्रिय को दस साल के ब्राह्मण लड़के को भी अपने पिता के रूप में मानना चाहिए| ऐसा व्यक्ति जो शूद्र को निर्देश देता है, या वो व्यक्ति जिसका शिक्षक एक शूद्र है वो श्राद्ध में आमंत्रित होने के लिए अयोग्य होगा|’

‘एक शूद्र शिक्षा प्राप्त करने के लिए अयोग्य है| ऊपरी वर्ण शूद्र को शिक्षा या सलाह ना दें’ ऐसा मनुस्मृति में लिखा गया है| कुछ विद्वानों का मानना है की मनुस्मृति में ये भी लिखा है की ‘ये आवश्यक नहीं है की शूद्र को नियमों और संहिताओं का पता होना चाहिए| इसका मतलब ये है की उन्हें पढ़ने की आवश्यकता नहीं है| जो व्यक्ति इसका उल्लंघन करेगा वो नरक में जाएगा|’

‘एक ब्राह्मण को ऐसे देश में ना रहने दें जहाँ शासक शूद्र हो|’’ मनुस्मृति में लिखा है की शूद्रों की उपस्थिति में वेदों को कभी नहीं पढ़ना चाहिए| सिर्फ एक ब्राह्मण सभ्य होता है| वो न्यायधीश के रूप में कार्य कर सकता है| लेकिन शूर्दों को ऐसा करने की इजाज़त नहीं है| ‘एक राजा जिसके साम्राज्य में क़ानून का पालन एक शूद्र कराए वो साम्राज्य किसी दलदल में फांसी गाय की तरह डूब जाएगा|’ ’अगर कोई ब्राह्मण को गुलाम बनाने की कोशिश करता है उस पर 600 पण का जुर्माना लगाना चाहिए|’

‘एक ब्राह्मण किसी शूद्र को किसी वेतन के बिना काम करने का आदेश दे सकता है| क्योंकि ब्राह्मणों की सेवा करने के लिए ब्रह्मा जी ने शूद्र को बनाया है|’ मनुस्मृति में ये भी लिखा है कि ‘भले ही एक ब्राह्मण, शूद्र को गुलामी से मुक्त कर दे लेकिन एक शूद्र फिर भी गुलाम बना रहता है मनुस्मृति के अनुसार किसी को भी उसे मुक्त करने का अधिकार नहीं है|’

मनुस्मृति में आगे कहा गया है की ‘एक शूद्र जो द्विज व्यक्ति का अपमान करता है उसकी जीभ कटेगी क्यूंकी वो नीच है|’ ’अगर एक शूद्र द्विज नामों और जातियों का उल्लंघन करता है तो 10 ऊँगली लम्बी लोहे की कील उसके मुँह में डाल दी जाए|’

मनुस्मृति में ये भी लिखा है की ‘यदि कोई शूद्र घमंड से ब्राह्मण को धर्म का उपदेश देता है तो राजा उसके मुँह और कानों में जलता हुआ तेल डलवा दे|’ मनुस्मृति में ये भी लिखा है की ‘एक शूद्र अगर उच्च जाती की महिला के साथ संभोग करता है तो उसे मृत्युदंड दे देना चाहिए और उसकी संपत्ति को जब्त कर लेना चाहिए|’ विद्वानों के अनुसार, मनुस्मृति में ये भी लिखा गया है की ‘एक ब्राह्मण शूद्र को बाध्य कर सकता है चाहे वो ख़रीदा गया हो या बिना काम किया हुआ|’

दोस्तों, अब आपको ये मालूम चल गया होगा की Manusmriti Book में शूद्रों के बारे में कौन कौन सी विवादित बातें लिखी गई हैं| इन बातों को समाज का पिछड़ा और दलित वर्ग कभी स्वीकार कर ही नहीं पाया| यही कारण है की Manusmriti Book की हर तरफ आलोचना होने लगी| Manusmriti Book को कुछ लोगों ने अपनाया और कुछ ने Manusmriti Book को सिरे से नकार दिया| इसलिए हम आपको Manusmriti in Hindi में समझाने वाले हैं और वो भी फुल detail में| महात्मा गांधी ने दलितों को हरिजन की संज्ञा दी थी| वे भी हरिजनों के साथ किये जाने वाले व्यवहार से असंतुष्ट थे| उनका ऐसा मानना था की इन्हे भी जीने का हक़ है| इन्हे भी हर वो काम करने का हक़ है जो एक सामान्य जाती वर्ग के लोग या अन्य लोग करते हैं| इसीलिए हर कोई Manusmriti Book का विरोध कर रहा है|

Manusmriti Dahan Divas

शायद आप में से बहुत काम लोग ये जानते होंगे की Manusmriti Dahan Divas किस दिन मनाया जाता है और क्यों मनाया जाता है| Manusmriti Dahan Divas की शुरुआत आखिर किसने और कब की ये भी बहुत कम लोग जानते होंगे| दोस्तों आज हम आपको बताएँगे की Manusmriti Dahan Divas कब मनाया जाता है| दरअसल Manusmriti Dahan Divas मनाने की शुरुआत हुई थी 25 December 1927 को| 

महान दार्शनिक, समाज सुधारक और कुशल राजनीतिज्ञ तथा भारतीय संविधान के सृष्टिकर्ता Baba Saheb Dr. Bheem Rao Ambedkar ने ही Manusmriti Dahan Divas मनाने की शुरुआत की थी| मनुस्मृति को बाबा साहेब काला कानून मानते थे| जैसा की हमने आपको ऊपर बताया की Manusmriti Book में शूद्रों के लिए जो बातें कही गई है वो अंबेडकर जी के विचार में तर्कसंगत नहीं हैं|

जानकारों के मुताबिक़ आंबेडकर मानते थे की मनुस्मृति एक ऐसा क़ानून है जो मनुष्य को एक पशु से भी बत्तर ज़िंदगी दे देता है| इतना ही नहीं इसमें जो महिलाओं के लिए बातें लिखी गई हैं उन्हें पढ़कर किसी को यकीन नहीं होगा| विद्वानों की माने तो Manusmriti Book में लिखा गया है की ‘पुरुष द्वारा त्याग दिया जाने या बेच दिए जाने के बावजूद कोई स्त्री दूसरे पुरुष की पत्नी नहीं कहला सकती| उसके विवाहित पति का उस पर जन्मजात अधिकार बना रहेगा|’

इसमें ये भी लिखा गया है की ‘स्त्रियों का वेद से कोई सरोकार नहीं है| यह शास्त्र द्वारा निश्चित है| अतः यदि कोई स्त्री वेदों का अध्धययन करती है तो वह पापयुक्त मानी जाएगी| इतना ही नहीं, उसे असत्य के सामान अपवित्र माना जायेगा|’ परन्तु कुछ लोगों का ये भी मानना है की मनुस्मृति में स्त्रियों को सम्मान देने की बात कही गई है| अब दोनों में से क्या सत्य है ये निर्णय हम आपके विवेक पर छोड़ते हैं| तो हम बात कर रहे थे Manusmriti Dahan Divas के बारे में|

आंबेडकर चतुर्वर्ण को मानने वालों में से नहीं थे| ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र ये जातियां मनुष्य को बांटने का काम करती हैं ऐसा आंबेडकर का मानना था| इसलिए उन्होंने Manusmriti Book को जलाने और Manusmriti Book में लिखी गई बातों को लागू नहीं होने देने का संकल्प कर लिया था| आंबेडकर ने समाज के शोषित वर्ग के लोगों को इकठ्ठा किया| साथ ही उन्हें Manusmriti Dahan Divas के कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता भी दिया|

जब आंबेडकर ने ये कार्यक्रम करने की सोची तो समाज के उच्च वर्ग के लोगों ने ये सुनिश्चित करना चाहा की इस कार्यक्रम लिए कहीं भी, कोई भी जमीन उन्हें ना मिले| ऐसा माना जाता है की तब एक मुस्लिम व्यक्ति  फ़तेहखान ने अपनी निजी जमीन पर ये कार्यक्रम करवाया| जिस स्थान पर Manusmriti Book को जलने और Manusmriti Dahan Divas का कार्यक्रम रखा गया था उस स्थान का नाम था महाड़ तालाब| यहीं पर आंबेडकर ने खुले तौर पर Manusmriti Book जलाई थी| इसलिए हम आपको Manusmriti in Hindi में समझाने वाले हैं| इस program को विफल बनाने के लिए एक और साजिश रची गई| ये तय किया गया की शूद्रों को खानपान से वंचित रखा जाए| कहीं पर इन्हे कुछ भी खाने को न मिल पाए| इसी कारण आंबेडकर और उनके साथियों को दूर जाकर खाना लाना पड़ा था| इस दौरान जो शपथ वहां मौजूद लोगों को दिलाई गई थी वो इस प्रकार है :-

’मैं जन्म चतुर्वर्ण में विश्वास नहीं रखता हूँ|’

’मैं जातिवाद में विश्वास नहीं रखता हूँ|’

’मेरा विशवास है की जातिभेद हिन्दू धर्म पर कलंक है और मैं इसे ख़त्म करने की कोशिश करूँगा|’

’यह मानकर की कोई भी ऊंचा नीचा नहीं है मैं कम से कम हिन्दुओं में खानपान में कोई प्रतिबंध नहीं मानूंगा|’

’मेरा विश्वास है की बहनों का मंदिर, तालाब और दूसरी सुविधाओं में समान अधिकार है|’

निष्कर्ष : (Conclusion)

तो दोस्तों आज आपने हमारे इस article में ये जाना की मनु कौन थे| Manusmriti in Hindi में जानकार आपने ये सीखा आज की Manusmriti Book क्या है, Manusmriti Dahan Divas आखिर कब और क्यों मनाया जाता है| Manusmriti Dahan Divas पर Manusmriti Book को ना जलाने देने के लिए कुछ साजिश भी रची गई थी ये भी आपको Manusmriti in Hindi मे समझ आया| हमने आपको ये भी बताया की Manusmriti Book में ऐसी कौन सी बातें लिखी गई थीं जिसकी वजह से Manusmriti Dahan Divas मनाने की आवश्यकता पड़ी| अगर आपको Manusmriti in Hindi में समझाने का हमारा प्रयास अच्छा लगा हो तो please इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर share करिएगा|

Disclaimer

दोस्तों, इस article में जो जानकारी हमने आपको प्राप्त करवाई है वो internet तथा Youtube की मदद से हमने इकठ्ठा की है| इस article को लिखने का motive सिर्फ आपको जानकारी देना है| किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का हमारा कोई इरादा नहीं है| अगर फिर भी किसी को लगता है की हमारी वजह से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो हम इसके लिए माफ़ी मांगते हैं|

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